ईरान ने इजरायल के सबसे संवेदनशील ठिकानों में से एक यानी उसके केमिकल हब को निशाना बनाया है। ये कोई मामूली रॉकेट अटैक नहीं है। जब आप किसी देश के केमिकल जोन पर मिसाइलें दागते हैं, तो आप सिर्फ इमारतें गिराने की कोशिश नहीं कर रहे होते। आप एक बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य आपदा पैदा करने की कोशिश कर रहे होते हैं। इजरायली प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए स्थानीय लोगों को घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी है। खिड़कियां बंद हैं और दरवाजे सील हैं। ये मंजर डराने वाला है।
पिछले कुछ घंटों में जो हुआ उसने युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। इजरायल का केमिकल हब वो इलाका है जहां भारी मात्रा में खतरनाक गैसें और औद्योगिक रसायन जमा रहते हैं। अगर एक भी मिसाइल सीधे स्टोरेज टैंक से टकराती है, तो धमाका तो छोड़िए, जो जहरीली हवा बहेगी वो पूरे शहर को कब्रिस्तान बना सकती है। ईरान को ये बात अच्छे से पता है। इसी वजह से ये हमला सीधे तौर पर इजरायल की नसों पर वार करने जैसा है।
इजरायल के केमिकल हब पर हमले की असल गहराई
ईरान ने इस बार अपनी मिसाइलों का रुख उन इलाकों की तरफ किया है जिन्हें इजरायल की 'अकिलीज़ हील' यानी सबसे कमजोर कड़ी माना जाता है। उत्तरी इजरायल के औद्योगिक क्षेत्रों में अमोनिया और अन्य खतरनाक रसायनों के विशाल भंडार मौजूद हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा विशेषज्ञों की मानें तो इजरायली डिफेंस सिस्टम (आयरन डोम और एरो) ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबे का गिरना भी उतना ही घातक साबित हो सकता है।
प्रशासन ने उत्तरी जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया है। लोगों को बताया गया है कि वे अपने घरों के 'मेमद' (सुरक्षित कमरों) से बाहर न निकलें। अगर आप वहां की सड़कों को देखें, तो वो पूरी तरह वीरान हैं। सायरन की आवाजें रुक-रुक कर गूंज रही हैं। ये हमला सिर्फ इजरायल की मिलिट्री को चुनौती नहीं दे रहा, बल्कि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को पंगु बनाने की एक सोची-समझी साजिश है।
इजरायली होम फ्रंट कमांड ने जो एडवाइजरी जारी की है, वो साफ बताती है कि खतरा कितना बड़ा है। रसायनों के रिसाव का मतलब है कि हवा में जहर घुल सकता है। ऐसे में मास्क पहनना और खुद को आइसोलेट करना ही एकमात्र रास्ता बचता है। क्या इजरायल इसके लिए तैयार था? सच तो ये है कि दुनिया का कोई भी देश ऐसे केमिकल हमले के लिए 100% तैयार नहीं हो सकता।
ईरान की रणनीति और मिडिल ईस्ट का बिगड़ता खेल
ईरान इस समय एक बहुत ही खतरनाक खेल खेल रहा है। वो जानता है कि सीधा आमने-सामने का युद्ध उसे महंगा पड़ेगा, इसलिए वो इजरायल के उन हिस्सों को चोट पहुंचा रहा है जो सबसे ज्यादा दर्द पैदा करें। केमिकल हब को चुनना कोई इत्तेफाक नहीं है। ये एक सोची-समझी साइकोलॉजिकल वॉरफेयर का हिस्सा है।
- आर्थिक चोट: केमिकल और फर्टिलाइजर इंडस्ट्री इजरायल की इकोनॉमी का बड़ा हिस्सा है। इन पर हमला मतलब अरबों डॉलर का नुकसान।
- जनता में खौफ: मिसाइल से घर गिरना एक बात है, लेकिन हवा में जहर का डर लोगों को मानसिक रूप से तोड़ देता है।
- डिटेरेंस की कोशिश: ईरान दिखाना चाहता है कि उसकी पहुंच इजरायल के हर कोने तक है।
मिडिल ईस्ट के जानकारों का कहना है कि ईरान ने अपनी 'प्रॉक्सि' ताकतों के बजाय इस बार सीधे मिसाइलों का इस्तेमाल करके ये बता दिया है कि वो अब पीछे हटने के मूड में नहीं है। ये हमला हिजबुल्लाह और हमास के साथ चल रहे संघर्ष के बीच एक नया और ज्यादा खतरनाक फ्रंट खोल देता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही कह दिया है कि "जो हमें चोट पहुंचाएगा, हम उसे छोड़ेंगे नहीं।" इसका मतलब है कि अब पलटवार और भी भीषण होगा।
प्रशासन की तैयारी और आम लोगों का हाल
इजरायली प्रशासन ने इस हमले के तुरंत बाद पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया है। इमरजेंसी रिस्पांस टीमें और हज़मत (खतरनाक सामग्री) टीमें तैनात कर दी गई हैं। ये टीमें रसायनों के स्तर की जांच कर रही हैं। सबसे बड़ी चुनौती अमोनिया टैंकों को सुरक्षित रखना है। सालों से इजरायल के भीतर ही ये मांग उठती रही है कि इन केमिकल हब को आबादी वाले इलाकों से दूर ले जाया जाए। अब वही डर हकीकत बनता दिख रहा है।
लोग डरे हुए हैं, और उनका डर जायज भी है। सोशल मीडिया पर जो वीडियो आ रहे हैं, उनमें आसमान में जलती हुई मिसाइलें और जमीन पर गिरता मलबा साफ दिख रहा है। घरों की खिड़कियों से धुआं उठते देखना अब इजरायलियों के लिए रोज की बात होती जा रही है, लेकिन इस बार हवा में कुछ अलग है—एक कड़वा सा डर।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस हमले में अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। ये मिसाइलें इजरायल के मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस को भेदने की क्षमता रखती हैं। हालांकि इजरायल का दावा है कि उसने ज्यादातर खतरों को टाल दिया है, लेकिन 'जीरो डैमेज' जैसी कोई चीज युद्ध में नहीं होती।
क्या ये एक पूर्ण युद्ध की शुरुआत है?
ईरान और इजरायल के बीच ये 'छाया युद्ध' (Shadow War) अब छाया से बाहर निकलकर सबके सामने आ गया है। केमिकल हब पर हमला करना युद्ध के अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत भी एक विवादित कदम है। अगर जहरीली गैस का बड़े पैमाने पर रिसाव होता है, तो इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। लेकिन ईरान फिलहाल इन सबकी परवाह करता नहीं दिख रहा।
इजरायल की जवाबी कार्रवाई कैसी होगी? ये सबसे बड़ा सवाल है। क्या इजरायल ईरान के तेल ठिकानों या परमाणु केंद्रों को निशाना बनाएगा? अगर ऐसा हुआ, तो पूरी दुनिया के लिए तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और हम एक ग्लोबल आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़े होंगे। मिडिल ईस्ट की ये आग सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहने वाली।
ईरान ने इस हमले से ये संदेश दे दिया है कि वो इजरायल के अंदर तक घुसकर मारने की ताकत रखता है। दूसरी तरफ, इजरायल ने भी अपनी मुस्तैदी दिखाई है। प्रशासन लगातार टीवी और रेडियो के जरिए लोगों को अपडेट दे रहा है। स्कूलों को बंद कर दिया गया है और गैर-जरूरी काम रुक गए हैं।
सुरक्षा के लिए जरूरी कदम और सावधानियां
अगर आप ऐसे किसी इलाके के करीब हैं या इस स्थिति को समझ रहे हैं, तो प्रशासन की गाइडलाइंस को इग्नोर करना भारी पड़ सकता है। इजरायली होम फ्रंट कमांड ने कुछ बेसिक रूल्स बताए हैं जो किसी भी केमिकल अटैक के दौरान जान बचा सकते हैं।
- अंदर रहें: बाहर निकलने की कोशिश न करें। घर का सबसे अंदरूनी कमरा चुनें।
- सील करें: दरवाजों और खिड़कियों के नीचे गीला तौलिया लगाएं ताकि बाहर की हवा अंदर न आए।
- एयर कंडीशनिंग बंद करें: एसी बाहर की हवा खींचता है, इसे तुरंत बंद कर दें।
- रेडियो/टीवी ऑन रखें: आधिकारिक घोषणाओं पर ही भरोसा करें, अफवाहों पर नहीं।
ईरान का ये हमला इजरायल के लिए एक वेक-अप कॉल है। अब समय आ गया है कि खतरनाक केमिकल प्लांट्स को आबादी से कोसों दूर शिफ्ट किया जाए। युद्ध कब और कैसे मुड़ेगा, ये कोई नहीं जानता, लेकिन इतना तय है कि अब खेल बहुत आगे निकल चुका है।
अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबसे पहले स्थानीय इमरजेंसी नंबरों को अपने पास रखें। किसी भी संदिग्ध गंध या धुएं की स्थिति में तुरंत प्रशासन को रिपोर्ट करें। पैनिक करने के बजाय शांत रहकर निर्देशों का पालन करना ही इस समय सबसे बड़ी समझदारी है। इजरायल के लिए आने वाले कुछ घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ईरान के इस दुस्साहस का जवाब अब उसकी सेना को देना है।