ईरान का सैयद 107 ड्रोन किस तरह इजरायल और अमेरिकी एयरबेस के लिए सिरदर्द बना है

ईरान का सैयद 107 ड्रोन किस तरह इजरायल और अमेरिकी एयरबेस के लिए सिरदर्द बना है

ईरान ने अपनी सैन्य तकनीक में एक ऐसा हथियार जोड़ा है जिसने मध्य पूर्व के पावर बैलेंस को हिलाकर रख दिया है। सैयद 107 ड्रोन सिर्फ एक उड़ने वाली मशीन नहीं है। ये एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में जिस तरह से इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले बढ़े हैं, उनके पीछे इस छोटे लेकिन घातक ड्रोन का हाथ बताया जा रहा है। अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ महंगे मिसाइल डिफेंस सिस्टम ही जंग जीतते हैं, तो आप गलत हैं। सैयद 107 जैसे सस्ते ड्रोन अरबों डॉलर के डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

ईरान ने इस ड्रोन को खास तौर पर जासूसी और 'कामिकाजे' (आत्मघाती) हमलों के लिए डिजाइन किया है। इसकी मारक क्षमता और सटीक निशाना इसे युद्ध के मैदान में एक खूंखार खिलाड़ी बनाता है। जब ये ड्रोन झुंड में हमला करते हैं, तो दुनिया के सबसे एडवांस रडार भी इन्हें पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ये कोई छोटी बात नहीं है।

सैयद 107 की तकनीकी ताकत और इसकी असल रेंज

सैयद 107 ड्रोन की बनावट इसे बेहद खास बनाती है। ये लगभग 2.5 मीटर लंबा है और इसके पंखों का विस्तार करीब 3 मीटर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी रेंज है। ये ड्रोन करीब 1,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। इसका मतलब है कि ये ईरान की सीमा से उड़कर सीधे इजरायल या इराक और सीरिया में स्थित अमेरिकी एयरबेस तक पहुंच सकता है।

इसमें एक 'लाइव वीडियो ट्रांसमिशन' फीचर है। ये हमला करने से पहले टारगेट की सटीक लोकेशन और वहां की हलचल की तस्वीरें कंट्रोल रूम को भेजता है। इसके बाद ये खुद को एक मिसाइल में बदल लेता है। जब ये किसी एयरबेस के रनवे या फ्यूल डिपो से टकराता है, तो नुकसान करोड़ों में होता है। इसकी रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता रडार की नज़रों से इसे बचाए रखती है।

इजरायल और अमेरिका के लिए ये ड्रोन इतना खतरनाक क्यों है

इजरायल के पास 'आयरन डोम' जैसा दुनिया का बेहतरीन डिफेंस सिस्टम है। अमेरिका के पास 'पैट्रियट' मिसाइलें हैं। लेकिन सैयद 107 जैसे ड्रोन इन सिस्टम्स की कमजोरी का फायदा उठाते हैं। ये ड्रोन बहुत धीमे और कम ऊंचाई पर उड़ते हैं। कई बार रडार इन्हें पक्षी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

जब एक साथ 10 या 20 सैयद 107 ड्रोन किसी एयरबेस की तरफ बढ़ते हैं, तो डिफेंस सिस्टम कन्फ्यूज हो जाता है। एक इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर होती है, जबकि एक सैयद 107 ड्रोन इसके मुकाबले बहुत सस्ता है। ईरान इसी 'कॉस्ट-इफेक्टिव' वॉरफेयर का इस्तेमाल कर रहा है। वो चाहता है कि अमेरिका और इजरायल अपने महंगे संसाधनों को इन सस्ते ड्रोनों को गिराने में बर्बाद कर दें।

अमेरिकी एयरबेस जो इराक और सीरिया के रेगिस्तानों में फैले हैं, वे इन ड्रोनों के आसान शिकार बन रहे हैं। वहां तैनात सैनिकों के लिए ये एक स्थायी तनाव बन गया है। आप कभी नहीं जानते कि कब एक छोटा सा ड्रोन आसमान से गिरेगा और पूरे बेस को हड़कंप में डाल देगा।

प्रॉक्सी वॉर और ईरान की सोची समझी चाल

ईरान खुद कभी सीधे सामने आकर हमला नहीं करता। वो अपने सहयोगियों जैसे हिजबुल्लाह, हूतियों और इराक के सशस्त्र गुटों को ये तकनीक मुहैया कराता है। सैयद 107 का इस्तेमाल इसी प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए हो रहा है। हाल के इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान ने इन ड्रोनों की एक बड़ी खेप रूस को भी भेजी है।

इससे पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ एक क्षेत्रीय ताकत नहीं रहा। उसकी ड्रोन तकनीक अब वैश्विक स्तर पर युद्ध की दिशा बदल रही है। सैयद 107 का प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर हो रहा है। ये ड्रोन असेंबल करने में आसान हैं और इन्हें कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। एक ट्रक के पीछे से भी इन्हें उड़ाया जा सकता है। यही बात इन्हें सबसे ज्यादा खतरनाक बनाती है क्योंकि इनका कोई फिक्स लॉन्च पैड नहीं होता जिसे नष्ट किया जा सके।

डिफेंस सिस्टम में बदलाव की सख्त जरूरत

अब सवाल ये है कि इजरायल और अमेरिका इसका मुकाबला कैसे करेंगे? पुराने जमाने के रडार अब काफी नहीं हैं। अब 'एंटी-ड्रोन जैमर्स' और लेजर आधारित हथियारों पर काम चल रहा है। लेकिन तकनीक की इस दौड़ में ईरान फिलहाल एक कदम आगे दिख रहा है।

सैयद 107 ने ये साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ ताकत के बारे में नहीं है। ये बुद्धिमानी और कम लागत में ज्यादा नुकसान पहुंचाने के बारे में है। इजरायल को अपनी सीमा के अंदर घुसते इन ड्रोनों को रोकने के लिए अपनी पूरी रणनीति दोबारा लिखनी पड़ रही है। वहीं अमेरिका को मध्य पूर्व में अपने अड्डों की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर का नया निवेश करना पड़ रहा है।

अगली बार जब आप किसी सैन्य संघर्ष की खबर सुनें, तो याद रखिएगा कि वो छोटा सा दिखने वाला ड्रोन बड़े-बड़े जहाजों और टैंकों से ज्यादा घातक हो सकता है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इन ड्रोनों के 'स्वार्म' (झुंड) को रोकने की है। अगर एक साथ 50 ड्रोन हमला कर दें, तो दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम उसे पूरी तरह नहीं रोक सकता। यही वो कड़वा सच है जिससे आज इजरायल और अमेरिका जूझ रहे हैं। अपनी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए अब इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और हाई-फ्रीक्वेंसी जैमिंग को प्राथमिकता देना ही एकमात्र रास्ता बचा है।

AK

Amelia Kelly

Amelia Kelly has built a reputation for clear, engaging writing that transforms complex subjects into stories readers can connect with and understand.